अध्याय 91

कैरोलाइन की आवाज़ जब कभी ऊँची होती, कभी धीमी, तो दर्शकों में उठती फुसफुसाहटें धीरे-धीरे थमने लगीं। सब लोग उसकी प्रस्तुति को एकाग्र होकर सुनने लगे।

जैसे ही वह खत्म हुई, सन्नाटे में डूबा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से फट पड़ा। कैरोलाइन की ओर उठी निगाहों में बस प्रशंसा ही झलक रही थी।

“ये सच में सिर्फ़ ए...

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